हनुमान जयंती और जन्मोत्सव में क्या फर्क है | What is the difference between Hanuman Jayanti and Hanuman birth anniversary?

“हनुमान जयंती” और “हनुमान जन्मोत्सव” शब्द अक्सर एक दूसरे के लिए उपयोग किए जाते हैं, लेकिन दोनों के बीच एक सूक्ष्म अंतर है।

हनुमान जयंती 

हनुमान जयंती का शाब्दिक अर्थ है “हनुमान की विजय”। यह एक हिंदू त्योहार है जो भगवान हनुमान के जन्म का जश्न मनाता है। हनुमान को हिंदू भगवान शिव का अवतार माना जाता है। 

हनुमान जन्मोत्सव 

हनुमान जन्मोत्सव संस्कृत शब्द “जन्मोत्सव” का अधिक शाब्दिक अनुवाद है। इसका सीधा सा अर्थ है “जन्मदिन”।

हनुमान जयंती और हनुमान जन्मोत्सव के पीछे का तर्क 

कुछ लोगों का तर्क है कि “जयंती” शब्द का उपयोग केवल नश्वर प्राणियों के जन्मदिन के लिए किया जाना चाहिए, क्योंकि हनुमान अमर हैं। उनका मानना है कि हनुमान के जन्मदिन के लिए अधिक उपयुक्त शब्द “जन्मोत्सव” है। हालाँकि, अन्य लोगों का तर्क है कि “जयंती” शब्द का उपयोग देवताओं के जन्मदिन के लिए भी किया जा सकता है। वे बताते हैं कि “जयंती” शब्द का अर्थ “जन्मदिन” से कहीं अधिक व्यापक है, और इसका उपयोग “जीत” या “उत्सव” के अर्थ में भी किया जा सकता है।

 

अंततः, “जयंती” या “जन्मोत्सव” शब्द का उपयोग करना व्यक्तिगत पसंद का मामला है। कोई सही या गलत जवाब नहीं है।

हनुमान जयंती और हनुमान जन्मोत्सव की तारीखों में भी अंतर है।

अर्थ में अंतर के अलावा हनुमान जयंती और हनुमान जन्मोत्सव मनाए जाने की तारीखों में भी अंतर है। हनुमान जयंती हिंदू माह चैत्र की पूर्णिमा को मनाई जाती है, जबकि हनुमान जन्मोत्सव हिंदू माह अश्विन के कृष्ण पक्ष के चौदहवें दिन मनाई जाती है।

 

इस मतभेद का कारण यह है कि हनुमान के जन्म के बारे में अलग-अलग किंवदंतियाँ हैं। एक पौराणिक कथा के अनुसार, हनुमान का जन्म चैत्र की पूर्णिमा के दिन हुआ था, जब वायु देवता ने एक वानर राजकुमारी अंजना के गर्भ में अपना बीज डाला था। एक अन्य किंवदंती के अनुसार, हनुमान का जन्म अश्विन माह के कृष्ण पक्ष के चौदहवें दिन हुआ था, जब अंजना ने एक पवित्र फल खाया था जिससे वह गर्भवती हुई थीं।

बोलो जय श्री राम, जय हनुमान 

आज हनुमान जयंती और हनुमान जन्मोत्सव दोनों ही दुनिया भर में हिंदू बड़े उत्साह के साथ मनाते हैं। हनुमान के भक्त मंदिरों और अन्य पवित्र स्थानों पर प्रार्थना करने, भजन गाने और अनुष्ठान करने के लिए इकट्ठा होते हैं। वे इस अवसर को चिह्नित करने के लिए प्रसाद (पवित्र भोजन) और मिठाइयाँ भी वितरित करते हैं।

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